Sunday, September 1, 2019

स्वदेशी सिर्फ वस्तु नहीं, विचार है

स्वदेशी जागरण मंच के पुरोधा माननीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का जौधपुर मे 8 जुलाई 2002 को एक भाषण हुआ जिसमे दत्तोपंत जी ने समझाया कि स्वदेशी सिर्फ वस्तु प्रयोग तक सीमित नहीं, विचार है। 

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उस सभा मे एक नेता बोला कि हमारे क्षेत्र में स्वदेशी की बात सुनकर के लोग मजाक उड़ाएंगे कि यह 16वीं शताब्दी में देश को ले जाना चाहते हैं । उस पर वह बोलते हैं कि आप के लोग क्या इतने एडवांस्ड हैं, जैसे  मोतीलाल नेहरू और दादा भाई नौरोजी जिन्होंने स्वदेशी अंगीकार किया, तो चुप हो जाते हैं । 

बाद में कुछ उदाहरण 10 ऐसे देते हैं कि स्वदेशी क्या है?
पहला उदाहरण उसमें से जापान के द्वारा अमेरिकी संतरे ना बिकने का है।
दूसरा उदाहरण ब्रिटेन की महारानी ने जर्मनी की कार खरीदने का निर्णय और जनता के विरोध के कारण अपने देश की कार ही खरीदना।
तीसरा उदाहरण वियतनाम प्रमुख हो ची मिन्ह का और यह बताना फटी और मुरम्मत की गई पैंट इस लिए पहनता हूँ कि "माय कंट्री कैन अफ़्फोर्ड थिस मुच्।"
चौथा उदाहरण,  गांधी इरविन पैक्ट के समय महात्मा गांधी जी का निंबू पानी में वह नमक पुड़िया से डालना जो उन्होंने दांडी यात्रा में प्राप्त किया था।
पाचवां उदाहरण, कोलकाता में देश भक्तों द्वारा ब्रिटिश पुडिंग का विरोध और भारतीय पुडिंग यानी रसगुल्ला जैसे मिष्टान्नका परिवर्धित स्वरूप बनाया।
सातवां उदाहरण मुस्तफा गाजी कमाल पाशा जब तुर्किस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने तुर्की भाषा में कुरान का अरबी से तर्जुमा करवाया और इस पर खून खराबा तो हुआ लेकिन इस्लाम का राष्ट्रीयकरण यानी स्वदेशीकरण हुआ।
आठवां उदाहरण,  क्रिश्चियन मिशनरीओं के कुछ ग्रुप किस प्रकार से भारतीय परंपरा के अनुसार आमीन की जगह ओम और चौगा भी भगवा पहन रहे हैं।
नोवा उदाहरण, किस प्रकार से बाबू गेनू ने विदेशी सामान नहीं आने दिया और हम 12 दिसंबर का दिन मनाते हैं ।
दसवां  चीन और कोरिया की सरकारों ने माइकल जैकसन को अपने यहां प्रवेश नहीं दिया क्योंकि यह उनके देशों पर सांस्कृतिक हमला होगा।


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