Sunday, September 1, 2019

कोका कोला की भयावह कथा



आज जो तकिया कलाम 'ठंडा मतलब कोकाकोला' हमारी जुबान पर चढ़ गया है, इसके पीछे एक भयावह कहानी है। पार्ले कंपनी का 80% हिस्सा सॉफ्ट ड्रिंक्स में था। वैसे भी उस समय हमारे देश में साफ्ट ड्रिंक्स के करीब 62 ब्रांड्स विभु, सुनौला, थम्स अप, लिम्का, कैम्पा कोला और बहुत सारे, पूरे देश भर में प्रचलित थे। 

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अब दो विदेशी ब्राण्ड ही बच गये सारी साफ्ट ड्रिंक्स कम्पनियाँ या तो बंद हो गई या विदेशियों द्वारा अधिग्रहीत (टेकओवर) कर ली गई। जैसे पारले प्रोडक्ट का साफ्ट ड्रिंक का जो 600 करोड़ रुपये (60 मिलियन्स) वार्षिक का साफ्ट ड्रिंक्स का व्यवसाय था, वह कारोबार कोका कोला ने अधिग्रहित (टेकओवर) किया। पार्ले प्रोडक्ट्स के शीतल पेय व्यवसाय के अधिग्रहण की इस कहानी को बताने से थोड़ा सा समय ज्यादा लगेगा। लेकिन, इससे यह स्पष्ट होगा कि भारत में उत्पादन के नाम पर 1990 के दशक में चलते हुये उद्यमों को अधिग्रहीत करने का षड़यंत्र था। कान्सपिरेन्सी किस तरह की होती रही है यह समझ आएगा। जब कोका कोला कम्पनी आई तो उसमें सबसे पहले पारले प्रोडक्ट्स लगेगा थम्स अप लिम्का के बॉटल बाजार से गायब होनी शुरू हो गयी। दुकानदारों को पार्ले के ब्राण्डों के खाली क्रेट के बदले कोका कोला के भरे क्रेट मिलने लग गये।

उस समय शीतल पेय काँच की बोतलों में आता था जो बॉटल मेन्यूफेक्चरर था। पारले प्रोडक्ट्स के बाॅटल निर्माता को भी अनुबन्धित कर लिया कि हम तुमसे इतनी बोतल खरीदेंगे शर्त यह है कि इस अवधि में तुम किसी दूसरे के लिए बोतल नहीं बनाओगे। अब पार्ले प्रबन्धन को लगा कि हमारी बोतल मार्केट से वापस री-सरकुलेट होकर नहीं आ रही है कि उनको धोकर वापस भरें, तब अपने मेन्युफेक्चरर को कहा कि इतनी बोतल बना दो तो उसने कहा नहीं अब तो मैं टाई-अप हूँ, मैं नहीं करूँगा। इसके अतिरिक्त हाइवे पर व अन्यत्र रेस्टोरेण्टों को भी अनुबन्धित कर लिया कि जैसे मान लो बनारस से दिल्ली तक हाइवे पर आपने उस समय देखा होगा कि जो ढाँबे वाले या रेस्टोरेंट वाले होते थे उनको एक छोटा फ्रिज मुफ्त देती थी कम्पनी और कहती थी अपना पूरा परिसर हमारे ब्राण्ड के नाम से पेंट करवा लो और एक या दो साल तक किसी दूसरे का साफ्ट ड्रिंक नहीं रखना तो यह फ्रिज मुफ्त देंगे। यानी कि बाजार पर अपना एकाधिकार करना। 

जैसा मैंने पूर्व में कहा कि हमारे यहाँ इनकम टैक्स रेट बहुत ऊंची थी, पूंजी निर्माण कठिन था। किसी भी कम्पनी का सार्वजनिक निर्गम (Public Issue of Shares) आता तो पूंजी निर्गमन नियन्त्रक अनुमोदन आवश्यक था। इसलिये हिन्दुस्तान में किसी भी कम्पनी में प्रवर्तकों (Promoters) के शेयर 10-20 प्रतिशत ही होते थे। 40 प्रतिशत के करीब शेयर्स फाइनेन्शियल इन्स्टीट्यूूशन्स के पास होते थे। उन दिनों ऐसे भी समाचार थे कि शेयर बाजार से पार्ले के शेयर कुछ कोका कोला कम्पनी ने खरीदने प्रारम्भ किये थे। इसलिये पार्ले के मालिकों को लगा कि कहीं ऐसा ना हो कि वो 10-12 प्रतिशत शेयर स्टाक मार्केट से खरीद कर उसका हास्टाइल टेकओवर (बलात अधिग्रहण) न हो जाए। ऐसे में पार्ले कम्पनी पूरी हाथ से निकल सकती थी, और सेप्टेम्बर 1993 आते-आते रमेश चौहान को लगा कि अब कोका कोला से लड़ना संभव नहीं। 

इसलिए 600 करोड़ के टर्नओवर वाली कम्पनी जिसके थम्स अप, लिम्का, गोल्ड स्पॉट  जैसे अत्यन्त लोकप्रिय ब्राण्ड थे बिक गयी। 24 अक्टूबर1993 को जब आगरा में ताजमहल के पास से शानोशौकत से कोका कोला ने बड़ा प्रदर्शन किया तो यह एक प्रकार से भारतीय उद्योगों पर ईस्ट इंडिया कंपनी की विजय जैसी ही थी। इस तरह से पिछले दिनों एफ.डी.आई. को खोलने से देश के एक कर उद्योग विदेशी स्वामित्व में गये हैं। अब तक देश के वे ही उत्पाद भारतीय उद्यम बनाते थे, वे अब भारत में विदेशी उद्यम बना रहे हैं।
(यह लेख श्री भगवती प्रकाश शर्मा की पुस्तिका "मेड बाई इंडिया" पर आधारित है) 

स्वदेशी सिर्फ वस्तु नहीं, विचार है

स्वदेशी जागरण मंच के पुरोधा माननीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का जौधपुर मे 8 जुलाई 2002 को एक भाषण हुआ जिसमे दत्तोपंत जी ने समझाया कि स्वदेशी सिर्फ वस्तु प्रयोग तक सीमित नहीं, विचार है। 

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उस सभा मे एक नेता बोला कि हमारे क्षेत्र में स्वदेशी की बात सुनकर के लोग मजाक उड़ाएंगे कि यह 16वीं शताब्दी में देश को ले जाना चाहते हैं । उस पर वह बोलते हैं कि आप के लोग क्या इतने एडवांस्ड हैं, जैसे  मोतीलाल नेहरू और दादा भाई नौरोजी जिन्होंने स्वदेशी अंगीकार किया, तो चुप हो जाते हैं । 

बाद में कुछ उदाहरण 10 ऐसे देते हैं कि स्वदेशी क्या है?
पहला उदाहरण उसमें से जापान के द्वारा अमेरिकी संतरे ना बिकने का है।
दूसरा उदाहरण ब्रिटेन की महारानी ने जर्मनी की कार खरीदने का निर्णय और जनता के विरोध के कारण अपने देश की कार ही खरीदना।
तीसरा उदाहरण वियतनाम प्रमुख हो ची मिन्ह का और यह बताना फटी और मुरम्मत की गई पैंट इस लिए पहनता हूँ कि "माय कंट्री कैन अफ़्फोर्ड थिस मुच्।"
चौथा उदाहरण,  गांधी इरविन पैक्ट के समय महात्मा गांधी जी का निंबू पानी में वह नमक पुड़िया से डालना जो उन्होंने दांडी यात्रा में प्राप्त किया था।
पाचवां उदाहरण, कोलकाता में देश भक्तों द्वारा ब्रिटिश पुडिंग का विरोध और भारतीय पुडिंग यानी रसगुल्ला जैसे मिष्टान्नका परिवर्धित स्वरूप बनाया।
सातवां उदाहरण मुस्तफा गाजी कमाल पाशा जब तुर्किस्तान के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने तुर्की भाषा में कुरान का अरबी से तर्जुमा करवाया और इस पर खून खराबा तो हुआ लेकिन इस्लाम का राष्ट्रीयकरण यानी स्वदेशीकरण हुआ।
आठवां उदाहरण,  क्रिश्चियन मिशनरीओं के कुछ ग्रुप किस प्रकार से भारतीय परंपरा के अनुसार आमीन की जगह ओम और चौगा भी भगवा पहन रहे हैं।
नोवा उदाहरण, किस प्रकार से बाबू गेनू ने विदेशी सामान नहीं आने दिया और हम 12 दिसंबर का दिन मनाते हैं ।
दसवां  चीन और कोरिया की सरकारों ने माइकल जैकसन को अपने यहां प्रवेश नहीं दिया क्योंकि यह उनके देशों पर सांस्कृतिक हमला होगा।


स्वदेशी जागरण मंच, लक्ष्य एवं उद्देश्य

स्वदेशी जागरण मंच, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का एक आर्थिक संगठन है जो स्वदेशी उद्योगों एवं संस्कृति के विकास के लिये जनता में जागरूकता पैदा करता है। इसकी पहचान संघ परिवार के एक घटक के रूप में है।



स्वदेशी जागरण मंच, २२ नवम्बर सन १९९१ को नागपुर में अरित्व में आया। 
राष्ट्रीय स्तर की पाँच संस्थाओं- भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, एवं सहकार भारती ने दत्तोपन्त ठेंगड़ी की उपस्थिति में सम्मिलित रूप से इसकी नींव रखी।

लक्ष्य एवं उद्देश्य
1. भारत की सुरक्षा, एकता को सुनिश्चित करना
2. एक आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण
3. भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को बढावा देना
4. प्राकृतिक संपदा का संरक्षण
5. सभी क्षेत्रों एवं सभी समाजोंका संतुलित विकास

कोका कोला की भयावह कथा

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